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पिछले एक साल में, मौत, तबाही, चिकित्सा सहायता की कमी, गरीबी और बेरोजगारी की कहानियां समाचार चक्र पर हावी रही हैं। ठीक ऐसे समय में, हमें एक देश के रूप में सूचित किया जाना चाहिए और वास्तविकताओं का सामना करना चाहिए।

प्रेस विज्ञप्ति- ऋचा चड्ढा के पीआर की तरफ से जारी। पिछले एक साल में, मौत, तबाही, चिकित्सा सहायता की कमी, गरीबी और बेरोजगारी की कहानियां समाचार चक्र पर हावी रही हैं। ठीक ऐसे समय में, हमें एक देश के रूप में सूचित किया जाना चाहिए और वास्तविकताओं का सामना करना चाहिए। लेकिन हर निराशापूर्ण स्थिति में भी आशा की किरण होती है। और इस मामले में, यह भारत के लोग हैं, जिनमें से कई एक दूसरे की मदद करने के लिए सभी बाधाओं के खिलाफ एक साथ आए हैं। 

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सामाजिक मुद्दों में अपनी रुचि के लिए समान रूप से जानी जाने वाली ऋचा चड्ढा ने ‘द किंडरी’ नाम से एक नई कम्युनिटी आधारित पहल शुरू की है, जिसका सीधा सा अर्थ है, असाधारण काम करने वाले आम लोगों को हौसला बढ़ाना। यह अभी केवल एक सोशल मीडिया पहल है। जब एक चोर द्वारा चोरी की गई दवाइयाँ लौटाने की खबर पिछले महीने एक साधारण नोट के साथ वायरल हुई, जिसमें लिखा था, ‘क्षमा करें, मुझे नहीं पता था कि ये कोरोना की दवाएं हैं’, ऋचा एक पारिवारिक मित्र कृष्ण जगोटा की मदद से इस पहल के के लिए प्रेरित हुईं।

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उसी पर बोलते हुए, ऋचा ने कहा, “मैं इस बात से प्रभावित हुई कि एक व्यक्ति, जिसने हताशा में कुछ चुराया था, उसके पास इतना बड़ा दिल और ईमानदारी थी कि उन्होंने उसे वापस कर दिया। मैं लोगों को ‘सकारात्मक’ होने और दर्द को अनदेखा करने के लिए नहीं कहना चाहती। दर्द, आघात और नुकसान की वास्तविकता। यह जहरीली सकारात्मकता के अलावा और कुछ नहीं है। साथ ही, द किंड्री गुलाबी बादलों और ऊनिकोर्न्स  के बारे में नहीं होगा, बल्कि वास्तव में हमारे आस-पास होने वाली घटनाएं हैं जो उतनी नहीं फैलती जितनी उन्हें चाहिए। लोग वास्तविक जीवन के नायकों की कहानियां सुनने के भी योग्य हैं। हम छोटी शुरुआत करेंगे और हम एक कम्युनिटी बनाने या मौजूदा लोगों को मजबूत करने की उम्मीद करते हैं। लक्ष्य उन गुमनाम नायकों को सेलिब्रेट करने का है जिनके बारे में आप काम ही पढ़ते हैं।

एक एस.ओ.एस की अपील का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर, मैंने महसूस किया कि आम नागरिक जीवन रक्षक दवाओं, हॉस्पिटल बेड, ऑक्सीजन के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं, उन लोगों के लिए जिन से वे कभी नहीं मिले हैं। हमने वास्तव में एक द्वि-पक्षीय प्रयास देखा है, जहां अस्थायी रूप से लोग अपने वैचारिक अंतर को भी भूल गए हैं और एक दुसरे की मदद करने के लिए आगे आये है। यह मुझे आशा देता है और मैं इन आशावादी कहानियों को साझा करना चाहती हूं जो वास्तविकता में निहित हैं। वास्तविक समाचारों के दर्द को कम करने के लिए हमें जानबूझकर अच्छाई को बढ़ाना चाहिए। यह स्पष्ट है कि इस चरण के माध्यम से जो हमें दिखाई देगा, वह है अजनबियों की दयालुता।”

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