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एडिनबर्ग में रहने वाले फिल्मकार एवं समीक्षक मार्क कजन ने 160 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री बनायी है जिसमें “गैंग्स ऑफ वासेपुर’’ सहित मुंबई में बनी पांच भारतीय फिल्मों को भी जगह दी गयी है।

नयी दिल्ली। एडिनबर्ग में रहने वाले फिल्मकार एवं समीक्षक मार्क कजन ने 160 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री बनायी है जिसमें “गैंग्स ऑफ वासेपुर’’ सहित मुंबई में बनी पांच भारतीय फिल्मों को भी जगह दी गयी है। इस डॉक्यूमेंट्री का नाम “द स्टोरी ऑफ फिल्म : अ न्यू जेरनरेशन” है।
वैश्विक महमारी के दौरान बनी और यादगार फिल्मी क्षणों से भरी हुई डॉक्यूमेंट्री का वर्ल्ड प्रीमियर 74वें कान फिल्म महोत्सव के पहले दिन होगा जो शायद दुनिया को यह बताने की कोशिश है कि सिनेमा आज भी और हमेशा जिंदा रहेगा भले ही इसके सामने कितनी भी मुश्किलें आएं।

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कान्स के ‘क्लासिक्स’ खंड का हिस्सा बनी “द स्टोरी ऑफ फिल्म : अ न्यू जेनरेशन” मैड्रिड में नये सिनेमा लाइब्रेरी (सिनेमाथेक्यू) के साथ शुरू होती है – यह उस माध्यम के कट्टर प्रेमियों के लिए उम्मीद और नवीकरण का प्रतीक है जो अगर गतिशील न हो तो उसका कोई अस्तित्व नहीं।
“ए न्यू जेनरेशन” कजिन की 15 घंटे की सर्वोत्तम रचना “ द स्टोरी ऑफ फिल्म : एन ओडिसी’’ (2011) के बाद की कहानी है जो अत्यधिक छवियों वाले और ध्यान की कमी वाले डिजिटल युग में रचनात्मक नवोन्मेष, प्रौद्योगिकी की प्रगति और देखने के नये तरीकों का पता लगाती है।
अमेरिकी और यूरोपीय सिनेमा के आखिरी दशक को शामिल करने के साथ ही यह एशियाई और अरब की फिल्मों पर भी बहुत ज्यादा गौर करती है। इसमें वैश्विक महामारी के पहलु और उसके असर : लॉकडाउन, फेस मास्क और शारीरिक दूरी- पर भी विचार किया गया है।

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“फिल्मों की नयी सहस्राब्दी” की विचारशील और दिलचस्प समीक्षा में अनुराग कश्यप की पांच घंटे की फिल्म “गैंग्स ऑफ वासेपुर”, राजकुमार हिरानी की “पीके”, संजय लीला भंसाली की “गोलियों की रासलीला रामलीला” आनंद गांधी की “शिप ऑफ थिसियस” और आनंद पटवर्धन की शानदार डॉक्यूमेंट्री “रीजन” का मौजूदा युग की सबसे महत्त्वपूर्ण फिल्मों के तौर पर जिक्र किया गया है।
“ए न्यू जेनरेशन” को कजिन्स ने ही लिखा, फिल्माया और कहा है। यह फिल्मों की रोमांचक श्रृंखला को शामिल करता है और फिल्मों की प्रमुख शैलियों के विकास की, फिल्मी के विस्तार की, सिनेमा में चेहरों की केंद्रीयता, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्मों और संचार उपकरणों के विस्फोट और प्रदर्शनों को कैद करने तथा कलाकारों को युवा दिखाने वाले उपकरणों के आगमन पर प्रकाश डालती है।

‘‘जोकर” और “फ्रोजन” के साथ शरू करते हुए इसमें विभिन्न प्रकार की फिल्मों को जगह दी गई है – “सीमेट्री ऑफ स्प्लेंडर”, “पैरासाइट” और “शॉपफिल्टर्स” से लेकर “मैड मैक्स – फ्यूरी रोड”, “ब्लैक पैंथर” और “मिडसोम्मर” और “नोर्टे – द एंड ऑफ हिस्ट्री”, “होली मोटर्स’’ और “एन एलिफेंट सिटिंग स्टिल टू हस्लर्स” से लेकर “ग्रैविट” और “बेबी ड्राइवर” तक इसका हिस्सा हैं ताकि 21वीं सदी के सिनेमा में तरीके और निर्देशन को कैद किया जा सके।
कजिन्स “गैंग ऑफ वासेपुर” को 80 वर्षों में गैंगस्टर फिल्म शैली के जन्म के बाद से“सबसे जटिल फिल्मों में से एक” मानते हैं।

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