फ्रांस इस्लामी जगत के साथ विवाद में ‘दब्बू’ नहीं बनेगा: राष्ट्रपति मैक्रों

पेरिस
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नीस में हुए आतंकी हमले पर कहा, उनका देश इस्लामी जगत के साथ विवाद में ‘दब्बू’ नहीं बनेगा। देश के तटवर्ती नगर नीस के नोत्रे दाम चर्च के सामने खड़े होकर उन्होंने यह बात कही। इसी चर्च में एक आतंकी ने दो महिलाओं समेत तीन लोगों को चाकू से मार डाला था और छह लोगों को घायल कर दिया था।
मैक्रों ने कहा, बिल्कुल साफ है कि फ्रांस हमले का निशाना है। सारा फ्रांस कैथोलिकों के साथ है, ताकि वे हमारे देश में पूरी आजादी के साथ अपने धर्म का पालन कर सकें। ताकि हर धर्म का पालन हो सके। राष्ट्रपति ने घोषणा की कि उनका देश इस्लामी जगत के साथ विवाद में ‘दब्बू’ नहीं बनेगा। देश के स्कूलों और धार्मिक स्थानों की सुरक्षा करने वाले सैनिकों की संख्या 3,000 से बढ़ा कर 7,000 कर दी जायेगी।
वहीं, फ्रांस के प्रधानमंत्री जौं कास्तेक्स ने इस घटना पर कहा, शिक्षक सामुएल पाती पर हमले द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर निशाना साधा गया था। नीस में हुए हमले द्वारा अब धर्मपालन की स्वतंत्रता को निशाना बनाया गया है। दक्षिणी फ्रांस के अविनों से भी बृहस्पतिवार को एक और ऐसी ही खबर सुनने में आई। वहां हथियारबंद आततायी कुछ कर पाता, इससे पहले ही पुलिस की गोली का शिकार हो गया। लियों नाम के शहर में पुलिस ने चाकू लिए एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। यह भी सुनने में आया कि सऊदी अरब के जेद्दा शहर में स्थित फ्रांसीसी वाणिज्य दूतावास के बाहर एक सुरक्षाकर्मी को चाकू से घायल कर दिया गया। दक्षिणी फ्रांस के तटवर्ती नगर नीस के चर्च में बृहस्पतिवार को आतंकी ने न केवल ‘नोत्रे दाम’ चर्च को चुना, बल्कि ठीक उस दिन यह हत्याकांड रचा, जब अनेक इस्लामी देशों में पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन मनाया जा रहा था। फ्रांस में बहुत से लोग इसे संयोग के बदले अपने धर्म के विरुद्ध युद्ध का सुविचारित उद्घोष मान रहे हैं। फ्रांस की जनता के लिए यह घटना असह्य दोहरी मार के रूप में आयी है। कोरोना की दूसरी भीषण लहर के कारण बृहस्पतिवार की आधी रात से वहां एक बार फिर देशव्यापी लॉकडाउन लागू हो गया है। स्कूल, कार्यालय, अत्यावश्यक वस्तुओं की दुकानें तथा कारखाने तो खुले रहेंगे, पर बाकी सब कुछ बंद रहेगा। रात में कर्फ्यू रहेगा।
वास्तव में केवल दो महीनों के भीतर निर्दोष साधारण लोगों पर चाकू से आतंकवादी हमलों की यह तीसरी घटना है। सितंबर में एक पाकिस्तानी शरणार्थी ने पेरिस स्थित व्यंग पत्रिका ‘चार्ली एब्दो’ के पुराने कार्यालय के पास चाकू से हमले में दो लोगों को घायल कर दिया था। 16 अक्टूबर को पेरिस के पास एक उपनगर के स्कूली शिक्षक सामुएल पाती का सिर काटने वाला हत्यारा भी शरणार्थी था, जो रूस के चेचन्या से आया था। नीस का आतंकी भी 21 साल का एक ट्यूनीशियाई शरणर्थी बताया जा रहा है। आश्चर्य नहीं कि मुस्लिम देशों के जिन शरणार्थियों का कुछ साल पहले तक यूरोप के देशों की जनता स्वागत किया करती थी, उनसे अब अपना पिंड छुड़ाना चाहती है।

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