ज्योतिष

5 अगस्त को श्री राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन का समय कितना शुभ है और इस दिन क्या-क्या संयोग बन रहे हैं इस पर विभिन्न ज्योतिषाचार्य ने अपने विचार प्रकट किए हैं। इसके साथ ही विभिन्न धर्म ग्रंथों, वेदों और ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार मुहूर्त शुभ है।

पांच नक्षत्रों के प्रतीक रखी जाएगी पांच चांदी की ईंट

घनिष्ठा नक्षत्र में शुरू होगा भूमि पूजन का कार्यक्रम

शतभिषा नक्षत्र में होगा समापन

5 अगस्त को अयोध्या राम मंदिर का भूमि पूजन होते ही मंदिर निर्माण आरंभ हो जाएगा। भूमि पूजन का समय दोपहर अभिजीत मुहूर्त में निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर की नींव रखेंगे और भूमि पूजन करेंगे। 5 अगस्त को भूमि पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त के 32 सेकेंड बेहत खास रहने वाले हैं। इसमें दोपहर के 12 बजकर 15 मिनट और 15 सेकंड के बाद ठीक 32 सेकंड के भीतर पहली ईंट रखनी अनिवार्य होगी। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए आधारशिला रखने का शुभ मुहूर्त सिर्फ 32 सेकेंड का रहेगा। जिसमें मंदिर की नींव रखना अनिवार्य होगा। अभिजीत मुहूर्त में ही मंदिर की नींव रखी जाएगी। ज्योतिष के अनुसार किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ में अभिजीत मुहूर्त का समय बहुत ही शुभ और कल्याणकारी होता है।

भूमि पूजन का समय कितना शुभ है ?

5 अगस्त को श्री राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन का समय कितना शुभ है और इस दिन क्या-क्या संयोग बन रहे हैं इस पर विभिन्न ज्योतिषाचार्य ने अपने विचार प्रकट किए हैं। इसके साथ ही विभिन्न धर्म ग्रंथों, वेदों और ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार मुहूर्त शुभ है। उनका मानना है कि जहां पर भगवान विष्णु के अवतार का मंदिर बन रहा है और उसमें फिर मुहूर्त अशुभ कैसे हो सकता है। भगवान शिव के अवतार हनुमान जी सारे संकट का निवारण करेंगे और भव्य राम मंदिर का निर्माण निर्विघ्नं होगा।

ज्योतिष शास्त्र में अभिजीत मुहूर्त 

हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य और अनुष्ठान शुभ मुहूर्त देखकर ही प्रारंभ किया जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार एक दिन में सूर्योदय से लेकर सूर्योदय तक कुल 30 तरह के मुहूर्त होते हैं। अभिजीत मुहूर्त सभी 30 मुहूर्तों में अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। अभिजीत का मतलब होता है विजेता और मुहूर्त का अर्थ समय होता है। यानी अभिजीत मुहूर्त में किया गया कोई भी शुभ कार्य अवश्य सफल होता है।

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सनातन धर्म में मान्यता है अगर किसी भी शुभ कार्य को शुभ मुहूर्त में किया जाए तो उसका परिणाम अवश्य ही सकारात्मक मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त की गणना करते समय दिन, तिथि, नक्षत्र, योग और दिनमान की प्रमुखता दी जाती है। अभिजीत मुहूर्त हर दिन में एक ऐसा समय आता है जिसमें लगभग सभी शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। 

अभिजीत मुहूर्त का समय

वास्तु विशेषज्ञ रंजीता ने बताया कि एक दिन में कुल मिलाकर 30 मुहूर्त होते हैं। इन 30 मुहूर्तों में कुछ शुभ कार्यों के लिए फलदायी होते हैं तो कुछ शुभ कार्यों में वर्जित माने गए हैं। सभी 30 मुहूर्तों में अभिजीत मुहूर्त को बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना गया है। अभिजीत मुहूर्त प्रत्येक दिन दोपहर होने से करीब 24 मिनट पहले प्रारम्भ होकर मध्यान्ह के 24 मिनट बाद समाप्त हो जाता है। उदाहरण के तौर पर समझा जाए तो अगर दिन में सूर्योदय ठीक 6 बजे होता है तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से ठीक 24 मिनट पहले प्रारम्भ होगा और दोपहर 12 बजकर 24 पर समाप्त हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त का समय प्रत्येक दिन सूर्योदय के अनुसार बदलता रहता है।

अभिजीत मुहूर्त में कौन कौन से शुभ कार्य किए जा सकते हैं

पंडित रामबाबू शर्मा ने बताया कि वैसे तो सभी तरह के शुभ कार्यो के लिए अभिजीत मुहूर्त बहुत शुभ और मंगलकारी माने गए हैं। अभिजीत मुहूर्त में यात्रा करना, नये कार्य का शुभारंभ करना, व्यापार शुरू करने का और पूजा करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। परन्तु कुछ लोगों का मानना है कि मांगलिक कार्य और ग्रह प्रवेश जैसे प्रमुख कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त के साथ और भी योगों को देखना आवश्यक है।

काशी के प्रख्यात विद्वान ने निकाला है मुहूर्त

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भूमिपूजन की तारीख तय करने से पूर्व ही भूमिपूजन के शुभ मुहूर्त की ओर पूरा ध्यान दिया। ट्रस्ट के ही अनुरोध पर काशी के प्रख्यात विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने विद्वानों से मंत्रणा के बाद भूमिपूजन का मुहूर्त निकाला है। आधारशिला स्थापन में शास्त्रीयता का पूरा ध्यान रखा गया है।

5 अगस्त को क्या संयोग बन रहे हैं?

राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए 5 अगस्त का दिन चुना जाना बहुत ही शुभ है। दरअसल इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। भूमि पूजन अभिजीत मुहूर्त में होगा। भूमि पूजन कार्यक्रम का आरंभ धनिष्ठा नक्षत्र में और समापन शतभिषा नक्षत्र में होगा। इन नक्षत्रों में भूमि पूजन के लिए काशी से भी पंडितों को बुलाया जा रहा है। अभिजीत मुहूर्त में भगवान राम का जन्म हुआ था और इसी मुहूर्त में उन्ही के मंदिर के निर्माण की पूजा होगी। रामचरित मानस में उनके जन्म और मुहुर्त के बारे में लिखा है नवमी तिथि मधुमास पुनीता शुक्ल पक्ष अभिजित हरिप्रीता…।

वैभवकारी है अभिजित मुहूर्त 

ज्योतिषियों का मानना है किए अभिजित मुहूर्त में भूमि पूजन होना वैभवकारी साबित होगा। इस मुहूर्त में जो भी कार्य शुरू किया जाता हैए उसमें सफलता अवश्य मिलती है। 15 मुहूर्तों में से अभिजित मुहूर्त आठवें नंबर पर आता है और बहुत ही फलदायी होता है। ज्योतिषशास्त्र में कहा गया है कि 28 वां नक्षत्र अभिजीत होता है जो सभी कार्यों के लिए शुभ है। अगर कोई शुभ मुहूर्त ना हो तो अभिजीत के समय बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य संपन्न किया जा सकता है। साथ ही 5 अगस्त को भाद्रपद महीने में सिंह राशि में सूर्य रहेंगे। जिससे यह मुहूर्त और भी फलदायी हो जाएगा।

धनिष्ठा नक्षत्र का भूमि से है संबंध 

धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं जो भूमि के कारक ग्रह हैं। इस नक्षत्र में भूमि पूजन कार्यक्रम का आरंभ होगा। वसु इस नक्षत्र के देवता हैं जो विष्णु और इंद्र के रक्षक हैं। इसलिए यह समय को भूमि पूजन के लिए शुभ संयोग माना जा रहा है। 27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा को 23वां नक्षत्र माना जाता है। कुछ ज्योतिष इस नक्षत्र का संबंध भगवान शिव और कृष्ण से भी संबंध मानते हैं।

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अभिलाषाएं पूरी करता है यह नक्षत्र 

भूमि पूजन के कार्यक्रम का अंत शतभिषा नक्षत्र में होगा। इस नक्षत्र के बारे में ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शतभिषा नक्षत्र ऐसा नक्षत्र है जो 100 अभिलाषाओं को पूर्ण करता है। शतभिषा नक्षत्र भूमि पूजन का समापन होना इसकी शुभता को दर्शाता है और मंदिर निर्माण के सफल होने की गवाही देता है।

पांच नक्षत्रों के प्रतीक रखी जाएगी पांच चांदी की ईंट

प्रधानमंत्री मोदी 40 किलो की चांदी की ईंट को गर्भगृह में रखेंगे। साथ ही पांच चांदी की ईंट और रखी जाएंगी जो पांच नक्षत्रों के प्रतीक होंगी। करीब साढ़े तीन फीट का गड्ढा खोदा जाएगाए जिसमें पाताल लोक के देवता की पूजा की जाएगी और प्रार्थना की जाएगी की लाखों सालों तक इस मंदिर को कोई नुकसान ना पहुंचे। 5 अगस्त की तारीख इसलिए भी अहम है, क्योंकि बीते साल इसी तारीख को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया गया था। 

भूमि पूजन के समय पर विवाद सही है या गलत है?

5 अगस्त को अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। राम मंदिर भूमि पूजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे। जहां पर मंदिर के नींव में ईंट रखकर निर्माण का शुभारंभ करेंगे। लेकिन राम मंदिर भूमि पूजन के मुहूर्त की तारीख को लेकर विवाद शुरू हो गया है। कई संतों ने भूमि पूजन के समय को अशुभ बता रहे हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती 5 अगस्त को भूमि पूजन के समय को अशुभ बता रहे हैं। उनका मानना है भाद्रपद के महीने में किसी भी तरह का शुभ कार्य का शुभारंभ अच्छा नहीं माना जाता है। इसके अलावा कई धर्म गुरु भी इस मुहूर्त में राम मंदिर भूमि पूजन के मुहूर्त पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं। जब से मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तारीखों का एलान हुआ है तब से काशी के संतों और पंडितों के द्वारा निर्धारित की गई तारीख पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कुछ संतों का मानना है कि मंदिर निर्माण के शुभारंभ का मुहूर्त सही नहीं है। संत भाद्रपद माह की 5 तारीख को अशुभ मान रहे हैं। वहीं विभिन्न धर्म ग्रंथों, वेदों और ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार मुहूर्त शुभ है। उनका मानना है कि जहां पर भगवान विष्णु के अवतार का मंदिर बन रहा है और उसमें फिर मुहूर्त अशुभ कैसे हो सकता है। भगवान शिव के अवतार हनुमान जी सारे संकट का निवारण करेंगे और भव्य राम मंदिर का निर्माण निर्विघ्नं होगा। वरिष्ठ पत्रकार डॉ मिथिलेश जेमिनी ने बताया कि 500 वर्षों के बाद भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है उनके कार्य में मुहूर्त को लेकर अनावश्यक विवाद का कोई औचित्य नहीं है। अनावश्यक इस मुद्दे को लंबा खींचना जरूरी नहीं है यहां सबसे जरूरी है की राम मंदिर का निर्माण समय पर आरंभ हो और हम सब प्रभु राम के दर्शन कर सकें।

मुहूर्त को लेकर सवाल

ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने श्रीराम मंदिर के शिलान्यास के पांच अगस्त के मुहूर्त पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि कोई कार्य उत्तम काल खंड में शुरू किया जाता है। पांच अगस्त को दक्षिणायन भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। शास्त्रों में भाद्रपद मास में गृह-मंदिरारंभ निषिद्ध है। शंकराचार्य ने कहा कि अभिजित मुहूर्त होने के कारण इसे शुभ मुहूर्त मानना भी सही नहीं है। मुहूर्त चिंतामणि के विवाह प्रकरण में बुधवार को अभिजित निषिद्ध है। कर्क के सूर्य में रहने तक सिर्फ श्रवण मास में शिलान्यास हो सकता है, भाद्रपद में नहीं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विद्वानों के अनुसार चातुर्मास में शुभ मुहूर्त का संयोग नहीं बन रहा है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राजेश ने बताया कि किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त की गणना करते समय दिन, तिथि, नक्षत्र, योग और दिनमान की प्रमुखता दी जाती है। अभिजीत मुहूर्त हर दिन में एक ऐसा समय आता है जिसमें लगभग सभी शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। 

ज्योतिष परिषद की राय

वहीं काशी विद्वत परिषद के मंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि हरिशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी के बीच विवाह आदि मंगल कार्य करने का निषेध माना जाता लेकिन पूजन आदि धार्मिक कार्यों पर रोक नहीं है। प्रो. रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि भूमि पूजन स्वयं भगवान राम का है ऐसे में मुहूर्त को लेकर कोई खास महत्व नहीं है।

भूमि पूजन का धार्मिक आयोजन

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुताबिक मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का आयोजन तीन दिनों तक चलेगा। रक्षाबंधन के दिन ही भूमि पूजन का कार्यक्रम आरंभ हो जाएगा 5 अगस्त तक चलेगा।

भूमि पूजन विधि

ट्रस्ट के द्वारा तय की 5 अगस्त की तारीख में मंदिर का भूमि पूजन किया जाएगा। दोपहर को अभिजीत मुहूर्त में सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा आरंभ हो जाएगी। कलश में कई पवित्र नदियों के जल और कई तीर्थ क्षेत्रों कि मिट्टी के साथ भूमि पूजन किया जाएगा। भूमि पूजन में मंदिर की नींव में लगभग 40 किलो चांदी की शिला का पूजन किया जाएगा। इसके अलावा चांदी की ईंट भी रख जाएगी।

कैसा होगा भूमि पूजन

राम मंदिर के नींव पूजन में प्रधानमंत्री तांबे का कलश स्थापित करेंगे। मंदिर की नींव पूजन में प्रयुक्त होने वाले ताम्र कलश में वैदिक रीति के मुताबिक गंगाजल के साथ सभी तीर्थों के जल, सर्वऔेषधि, पंच रत्न जिनमें हीरा, पन्ना, माणिक, सोना और पीतल रखे जाएंगे। इसके साथ ही पाताल लोक के राजा शेषनाग और शेषावतार की प्रसन्नता के लिए चांदी के नाग-नागिन, भूमि के आधार देव भगवान विष्णु के कच्छप अवतार के प्रतीक कछुआ भी नींव में स्थापित किए जाएंगे। मंगल कलश में सेवर घास रखकर सभी तीर्थों सहित गंगाजल से इस कलश को भरा जाएगा। वैदिक वास्तु पूजन और विधान के अनुसार कलश स्थापित करने के बाद नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा नाम की पांच ईंटों/ शिलाओं की पूजा की जाएगी। इस वैदिक पूजन के बाद ही सारी सामग्री नींव में स्थापित कर मंदिर का औपचारिक निर्माण आरंभ किया जाएगा। इस प्रकार श्रीराम मंदिर का श्रीगणेश होगा।

 

राम मंदिर की विशेषता

राम मंदिर की ऊंचाई 161 फीट, लंबाई 268 फीट और चौड़ाई 140 फीट होगी। मंदिर में 212 खंभे होंगे और प्रत्येक खंभे में 16 मूर्तिया होगी। इसके अलावा भूतल में सिंहद्वार, गर्भगृह, नृत्यद्वार और रंगमंडप होगा। मंदिर के प्रथम तल पर राम दरबार की मूर्तिया रखी जाएगी। 45 एकड़ में रामकथा कुंज भी होगा। मंदिर में 5 गुंबद बनाया जाएगा।

कब तय हुई थी मंदिर निर्माण की तारीख

अयोध्या में 18 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों की बैठक में मंदिर के भूमि पूजन की तारीख तय की गई थी। पहले ट्रस्ट की ओर से 3 और 5 अगस्त का प्रस्ताव रखा गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इनमें से 5 अगस्त की तारीख को मंजूरी दी थी। राम मंदिर के भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे।

भूमि पूजन के दिन देशभर में दीपावली मनाने की तैयारी

पांच अगस्त को दोपहर सवा 12 बजे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम के भव्य मंदिर के लिए भूमि पूजन अनुष्ठान करेंगे तो उसी दिन रात्रि को पूरी दुनिया में फैले राम भक्त दीपावली से पूर्व ही घर-घर दीप प्रज्ज्वलित करके खुशियां मनाएंगे। विश्व हिन्दू परिषद इस दिन प्रत्येक हिंदू परिवार को गौरवमयी अवसर से जोड़ने के लिए वृहद दीपोत्सव अभियान चला रहा है। शहर हो या गांव घर-घर, दीपोत्सव मनाया जाएगा। 

– अनीष व्यास

ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता

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