अक्षय कुमार की फिल्म के टीजर में लोगों ने ढूंढ निकाली बड़ी गलती, बोले दिहाड़ी वाला एटीट्यूड नहीं चलता

बॉलीवुड के खिलाडी अक्षय कुमार एक के बाद एक सुपर फ्लॉप फिल्में देते जा रहे हैं। अब ऐसा लगता है कि लाइन से फ्लॉप देने वाले अक्षय को इसकी आदत-सी हो गई है और जल्द ही वो एक बार फिर फैंस को मायूस करने के लिए तैयार हैं। ऐस हम नहीं कह रहे बल्कि खुद अक्षय के फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स का ऐसा कहना है। आपको बता दें, इस वक्त अक्षय कुमार को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है। खास बात ये है कि ट्रोलिंग का सिलसिला अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म के टीजर रिलीज के बाद ही शुरू हुआ है। दरअसल, पृथ्वीराज चौहान के बाद अब एक्टर बड़े पर्दे पर छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल प्ले करने वाले हैं। इस किरदार को सही से निभाना एक्टर की जिम्मेदारी है क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार को निभाने में अगर जरा सी भी चूक हुई तो ऑडियंस उन्हें नहीं बख्शने वाली। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि ये फिल्म भी किसी को रास नहीं आने वाली। क्योंकि जो टीजर हाल ही में रिलीज किया गया था उसमे पहले तो अक्षय के लुक को लेकर ही लोगों ने उन्हें ट्रोल कर दिया था। वहीं अब इस टीजर में लोगों ने कुछ ऐसी गलतियां ढूंढ निकाली हैं, जिसके बाद अक्षय की तो बैंड बज ही रही है साथ ही सोशल मीडिया पर भी मीम्स की बाढ़ आ गई है। वेडात मराठे वीर दौड़ले सात के टीजर में कुछ ऐसी बड़ी गलतियां की गई है जिससे लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। उनका कहना है कि मेकर्स ने हिस्ट्री के साथ छेड़छाड़ की है और उनका तथ्यों से कोई लेना देना नहीं है, वो बस पैसा कामना चाहते हैं। दरअसल हुआ ये कि फिल्म के टीजर में जब अक्षय कैमरे के करीब पहुंचते हैं तो छत पर झूमर टंगा दिखाई देता है। भले ही झूमर कितना भी कीमती क्यों न हो लेकिन ये कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे अजीब बात ये है कि इस झूमर में बल्ब लगे हुए हैं जबकि उस दौर में बल्ब थे ही नहीं। इस बड़ी गलती की तरफ ध्यान देने वाले यूजर ने लिखा, एक तो सस्ता मेकअप करके हमारे छत्रपति महाराज का अपमान कर रहे हो। ऊपर से बल्ब जला रखे हैं। उस दौर में तो कनाडा में भी बिजली और बल्ब नहीं था। जब इतने बड़े किरदार पर काम करते हो तो प्रोजेक्ट में दिल और जान लगानी पड़ती है, डेली शिफ्ट की दिहाड़ी वाला एटीट्यूड नहीं चलता। एक तो सस्ता मेकअप करके हमारे छत्रपति महाराज का अपमान कर रहे हो। ऊपर से बल्ब जला रखे हैं। उस दौर में तो कनाडा में भी बिजली और बल्ब नहीं था। तो दूसरे यूजर ने लिखा, मुझे नहीं पता था कि छत्रपति शिवाजी महाराज के जमाने में थॉमस एडिसन ने बल्ब का आविष्कार किया था। बहुत ज्यादा क्रिएटिव लिबर्टी एसेंस को बर्बाद कर देती है। एक शख्स ने फैक्ट बताते हुए लिखा, श्हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज 1630 से 1680 के बीच रहे। बिजली का बल्ब लगभग दो सौ साल बाद 1880 में आया! ये रचनात्मक स्वतंत्रता भी नहीं है- ये सिर्फ आलसी फिल्म मेकिंग है। अब कुछ इसी तरह से लोग एक्टर और मेकर्स को इस गलती के लिए फटकार लगा रहे हैं।

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